सामाजिक कुरीतियाँ और नारी , उसके सम्बन्ध , उसकी मजबूरियां उसका शोषण , इससब विषयों पर कविता

Wednesday, July 2, 2008

शब्द ही ना समझे पर शब्दो को

किस शब्द ने किस शब्द से क्या कहा
किस शब्द से किस शब्द को चोट लगी
किस शब्द से किस शब्द को दर्द हुआ
किस शब्द से किस शब्द को प्यार हुआ
किस शब्द से किस शब्द को नफरत हुई
शब्दो के जाल मे शब्दो की उम्र हुई
पर शब्द ही ना समझे शब्दो को

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10 comments:

advocate rashmi saurana said...

वाह रचना जी क्या कविता लिखी है. छोटी सी पर भाव बहुत सुंदर . बधाई हो.
ऑर एक बात मे बहुत बिज़ी रहती हू. लेकिन अगर समय मिला तो नारी ब्लॉग पर ज़रूर लिखुगी.

Anonymous said...

rashmi surana ji
naari blog aap ka hee haen , aap jase kabil nariyo par fakr haen
aap wahan likhegee , apnee ray daegii to naari bllog sadsyo ko bahut achchaa lagegaa . aap advocate haen isliyae aap kaa wahaan kament karna aur apnii ray aur post dena bahut jarurii haen
rachna

सतीश said...

अच्छी शब्दावली लिखी।

mehek said...

shabd hi na samajh paye shabdon ko,sara shabdon ka hi to khel hai,shabdon ko gunfati sundar kavita ,bahut badhai

अबरार अहमद said...

सब शब्दों का खेल है। बहुत बढिया।

kmuskan said...

waah rachna ji bahut khub likha hai.........shabdo ko shabdo ke jaal main hi lapet dala

नीरज गोस्वामी said...

इसे कहते हैं शब्दों की जादूगरी....और आप वाकई कमाल की जादूगर हैं... बधाई
नीरज

रंजू ranju said...

वाह बहुत सुंदर शब्द लिखे आपने रचना ..बहुत पसंद आई मुझे यह

रचना said...

मेरे शब्दों की प्रशंसा मे आए शब्दों को मेरे शब्दों का धन्यवाद

मीनाक्षी said...

बहुत दिनों बाद ब्लॉग जगत में आने का मौका मिला तो शब्द मेरे भी कुछ कहने को मचल उठे....

किसी शब्द ने किसी शब्द से जो भी कहा हो...

पर
क्यों शब्द एक दूसरे को समझ नहीं पाते...
क्यों शब्द से शब्द को दर्द पहुँचता है
.....
क्यों शब्द से शब्द को चोट पहुँचती है
....
क्यों शब्द से शब्द को नफरत होती है
.....
क्यों नहीं बस शब्द को शब्द से सिर्फ प्यार ही होता है....
क्यों नहीं शब्द शब्द की भाषा नहीं समझ पाता है....
शब्दों के इस जाल में शब्द उलझ कर क्यों रह जाते हैं...
निशब्द क्यों झेलते हैं एक दूसरे को....?