सामाजिक कुरीतियाँ और नारी , उसके सम्बन्ध , उसकी मजबूरियां उसका शोषण , इससब विषयों पर कविता

Sunday, July 27, 2008

इक्सवी सदी की रहनुमा है

नन्ही आँखे खुली
बिटर बिटर देख मुस्कराई
बढ़ने लगी अमर बेल सी
माँ देख कभी हुई चिंतित
कभी दिल से दुआ निकल आई

लगी सिखाने उसको वही फ़र्ज़ सारे
जो कभी थे उसको अपनी माँ से
देने लगी वही उपदेश जो मिले थे उसको माँ से

सुन के उसकी बेटी मंद मंद मुस्कराई
फ़िक्र करो न माँ तुम मेरी
मैंने अपनी ज़िंदगी
अपने इरादों से है सजाई


भूल गई माँ कि उसकी बेटी
इक्सवी सदी की रहनुमा है
जिसे पता है अपने अधिकारों का
और मंजिल का जानती हर निशाँ है
जोश है उस में ,उमंग है उसमें
हर ज़ंग को जीतने का जज्बा है

अपने पक्के इरादों से
आसमान को छू के आना है
पी के अपने आंसू ख़ुद ही
यह जीवन नही बिताना है
हटा देने हैं अपने जीवन के कांटे
और इस ज़िंदगी के हर लम्हे को
अपने माप दंड से सजाना है !!
© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

9 comments:

Keerti Vaidya said...

good job

nav pravah said...

अच्छा प्रयास
आलोक सिंह "साहिल"

राकेश खंडेलवाल said...

अपना निश्चय,अपना निर्णय
अपने ही अधिकार
स्वयं खोलने होंगे आखिर
खुले हुए जो द्वार

mehek said...

अपने पक्के इरादों से
आसमान को छू के आना है
पी के अपने आंसू ख़ुद ही
यह जीवन नही बिताना है
हटा देने हैं अपने जीवन के कांटे
और इस ज़िंदगी के हर लम्हे को
अपने माप दंड से सजाना है !!
wah wah ranju ji,shabon ke itne khubsurat tee hai,bahut sundar,aasha se bharpur,sach mein aaj ki beti 21 vi sadi ki hai.

शोभा said...

रंजना जी
बहुत ही प्यारी रचना है। माँ- बेटी के सम्बन्ध को इतने सुन्दर रूप में प्रस्तुत कियाहै कि आँखें भर आई।
भूल गई माँ कि उसकी बेटी
इक्सवी सदी की रहनुमा है
जिसे पता है अपने अधिकारों का
और मंजिल का जानती हर निशाँ है
जोश है उस में ,उमंग है उसमें
हर ज़ंग को जीतने का जज्बा ह
बधाई स्वीकारें ।

Manvinder said...

पी के अपने आंसू ख़ुद ही
यह जीवन नही बिताना है
हटा देने हैं अपने जीवन के कांटे
और इस ज़िंदगी के हर लम्हे को
achhi kavita hai
badhaaee
Manvinder

Ila's world, in and out said...

बहुत ही सार्थक कविता.

राष्ट्रप्रेमी said...

अपने पक्के इरादों से
आसमान को छू के आना है
पी के अपने आंसू ख़ुद ही
यह जीवन नही बिताना है
हटा देने हैं अपने जीवन के कांटे
और इस ज़िंदगी के हर लम्हे को
अपने माप दंड से सजाना है !!
उत्तम बहुत उत्तम, बेटियां अपने अरमानों को निर्भय होकर पूरे कर सके यही कामना है.

Diwakar Joshi said...

very well said...............