सामाजिक कुरीतियाँ और नारी , उसके सम्बन्ध , उसकी मजबूरियां उसका शोषण , इससब विषयों पर कविता

Friday, June 6, 2008

हस्ताक्षर

मटमैले झुरिँयोदार
कागजी - चेहरे पर
समय ने लिखा
" विगत से मत जोडो , आगत की चिंता छोडो
वर्तमान मै जियो
इस क्षण को भोगो "
पढ़ा , समझा और
मैने हस्ताक्षर कर दिये ।


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3 comments:

mahendra mishra said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति धन्यवाद.

mehek said...

wow its simply superb,and so true also,badhai

रंजू ranju said...

सही में जो अब है वही सच है ..सुंदर अभिव्यक्ति