सामाजिक कुरीतियाँ और नारी , उसके सम्बन्ध , उसकी मजबूरियां उसका शोषण , इससब विषयों पर कविता

Friday, December 31, 2010

मंगलमय हो यह नव-वर्ष!


नया साल आया है फिर से 
                 सबके लिए यह  हो आदर्श.
नये साल में सत्य अहिंसा
                  हो सबका जीवन-निष्कर्ष.
भूल जाएँ सब रंजोगम को
                 मिलजुल करें विचार विमर्श.
सुख-समृधि , धान्य-धन बढ़े
                 मधुर बने जीवन संघर्ष.
सुख-चैन रहे सभी दिलों में
                 गाएँ मिल सब गीत सहर्ष.
हे प्रभु! यही विनती हमारी
                  मंगल मय हो यह नव-वर्ष.


© 2008-10 सर्वाधिकार सुरक्षित!

5 comments:

कविता रावत said...

नव वर्ष २०११ आपके जीवन में सुख, समृद्धि व मनोवांछित फलदायी हो, यह मेरी हार्दिक शुभकामना है.

कुमार राधारमण said...

सुंदर विचार। आपके जीवन में भी ऐसा ही घटित हो। शुभकामनाएं स्वीकार कीजिए।

डॉ. पूनम गुप्त said...

बहुत-बहुत-धन्यवाद !

shikha kaushik said...

aap ko bhi nav varsh ki hardik shubhkamnaye .mere blog 'vikhyat'par aapka hardik swagat hai .

प्रदीप कुमार said...

bahut hi badhiya..
kripya meri kavita padhe aur upyukt raay den..
www.pradip13m.blospot.com