सामाजिक कुरीतियाँ और नारी , उसके सम्बन्ध , उसकी मजबूरियां उसका शोषण , इससब विषयों पर कविता

Monday, December 20, 2010

आँचल

प्रेम से युक्त है वह आँचल,
 स्नेह से संयुक्त है वह आँचल,
   ममता का आगार है वह आँचल,
    प्यार का भंडार है वह आँचल,
  सुख में प्यार छलकाता है वह आँचल,
 दुःख में गले लगाता है वह आँचल,
सब पर प्यार लुटाता है वह आँचल,
  सबको पास बुलाता है वह आँचल,
   शक्ति से परिपूर्ण है वह आँचल,
     धेर्य से सम्पूर्ण है वह आँचल,
   और नहीं कोई ,वह है  ,
"माँ का आँचल"

11 comments:

shikha kaushik said...

maa! ki mahanta ko bahut hi sundar shabdon me abhivyakt kiya hai .badhai .

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

सार्थक रचना।

---------
आपका सुनहरा भविष्‍यफल, सिर्फ आपके लिए।
खूबसूरत क्लियोपेट्रा के बारे में आप क्‍या जानते हैं?

आलोकिता said...

nice explanation

ana said...

baht hi bhavpoorna

smshindi said...

बहुत सुंदर

smshindi said...

"समस हिंदी" ब्लॉग की तरफ से सभी मित्रो और पाठको को
"मेर्री क्रिसमस" की बहुत बहुत शुभकामनाये !

()”"”() ,*
( ‘o’ ) ,***
=(,,)=(”‘)<-***
(”"),,,(”") “**

Roses 4 u…
MERRY CHRISTMAS to U…

मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है

वाणी गीत said...

बहुत सुन्दर !

महाशक्ति said...

बेहतरीन कविता

shalini kaushik said...

mere utsah vardhan hetu dhanyawad...

shalini kaushik said...

mere utsah vardhan hetu dhanyawad...

हल्ला बोल said...

ब्लॉग जगत में पहली बार एक ऐसा सामुदायिक ब्लॉग जो भारत के स्वाभिमान और हिन्दू स्वाभिमान को संकल्पित है, जो देशभक्त मुसलमानों का सम्मान करता है, पर बाबर और लादेन द्वारा रचित इस्लाम की हिंसा का खुलकर विरोध करता है. साथ ही धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कायरता दिखाने वाले हिन्दुओ का भी विरोध करता है.

समय मिले तो इस ब्लॉग को देखकर अपने विचार अवश्य दे
.
जानिए क्या है धर्मनिरपेक्षता
हल्ला बोल के नियम व् शर्तें