सामाजिक कुरीतियाँ और नारी , उसके सम्बन्ध , उसकी मजबूरियां उसका शोषण , इससब विषयों पर कविता

Sunday, November 28, 2010

इग्नोर करो

चलती कार मे
एक लड़की कि अस्मिता को लुटा जाता हैं
और लड़की को ही समझाया जाता है
इग्नोर करो ये सब तो होता रहता हैं



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2 comments:

POOJA... said...

न सिर्फ ignore करो बल्कि सहते चलो जो भी हो रहा है आसपास...

Arvind Mohan said...

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