सामाजिक कुरीतियाँ और नारी , उसके सम्बन्ध , उसकी मजबूरियां उसका शोषण , इससब विषयों पर कविता

Thursday, August 12, 2010

सावन

रुकी रुकी सी बारिशों के बोझ से दबी दबी
झुके झुके से बादलों से -
धरती की प्यास बुझी
घटाओं ने झूमकर , मुझसे कुछ कहा तो है
बूंदे मुझे छू गई -
तेरा ख्याल आ गया
मेघों ने बरसकर ,
तुझसे कुछ कहा है क्या -
बूंदों की रिमझिम में ,भीगा सावन आ गया

Happy Teej to all!!!

3 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

तीज की आपको भी बधाई ..सुन्दर प्रस्तुति

Sonal Rastogi said...

aap sabhi ko teej shubh ho

फ़िरदौस ख़ान said...

बहुत सुन्दर ...