सामाजिक कुरीतियाँ और नारी , उसके सम्बन्ध , उसकी मजबूरियां उसका शोषण , इससब विषयों पर कविता

Wednesday, December 31, 2008

कुछ नया सा

पुराना कुछ बीत रहा

तो क्या

उसे भूलेंगे नही

कुछ अच्छी चीजे होंगी

और कुछ गलतियों की पोटली

सब को बाँध कर सहेज कर

उस में औ नया एहसास भर देंगे

लड़खडाए कदम फिर से चलेंगे

नए उत्साह के साथ

नई उम्मीद के निम् तले

ताकि पिचली कड़वाहट याद कर

कुछ मीठे रिश्ते बन सके

आने वाले नव पर्व पर कुछ नए

ख्वाबो को अंजाम दे सके ........



नारी समूह की और से सभी को नया साल मुबारक

© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

3 comments:

रचना said...

nayaa saal aap ko bhi shubh ho mehak aur ishwar sawe kamna hae ki desh kae liyae yae saal sukh shanti aur tarraki laayae

Amit said...

बहुत ही अच्छा कविता थी ...नव वर्ष की आपको हार्दिक शुभकामनाएं

Vidhu said...

wish you a happy new year.. nice feelings