सामाजिक कुरीतियाँ और नारी , उसके सम्बन्ध , उसकी मजबूरियां उसका शोषण , इससब विषयों पर कविता

Wednesday, December 3, 2008

लिपस्टिक पाउडर लगाने वाली भी देश चलाने का जज़्बा रखती है

कल महक की ये कविता नारी कविता ब्लॉग पर आयी हैं , सब से निवेदन हैं की जरुर पढे । दोबारा पोस्ट कर रही हूँ ।

कई बार अपनी क्षमता का
एहसास कराने पर भी
बिना ग़लती के अक्सर
उस पर
उंगलिया उठती है ?

बड़े होकर जो भटकते लोग
किसी
में हिम्मत नही उन्हे सुधारे
याद रखना ऐसो को सिर्फ़ एक नारी
एक मा ही तमाचा
रसीद कर सकती है

कुर्सी पर बैठे ढोल पीटने वालो
सुनाई दे
रही है हमारी आवाज़
लिपस्टिक पाउडर लगाने वाली भी
देश चलाने का जज़्बा रखती
है

© 2008-09 सर्वाधिकार सुरक्षित!

16 comments:

Dr. Shyam Gupta said...

jajvaa to theek hee hai yoro

par shamaa jalaane ke liye,

lipistik kee kyaa jarurat hai?

shaheedon ko kyaa lipistik

dikhaanaa yaaro.

रचना said...

@dr shyam guota पूरी नारी मे बस लिपस्टिक ही नज़र आती हैं जिनको चश्मा अपना बदल ले क्युकी देश मे दरिन्दे
इसलिये आतंक फेलाते हैं नेता यहाँ के बस औरतो की लिपस्टिक देखते नज़र आते हैं

Ashish Khandelwal said...

नारी के इस जज़्बे को सलाम..

रंजना [रंजू भाटिया] said...

सही कहा आपने महक ...

कई बार अपनी क्षमता का
एहसास कराने पर भी
बिना ग़लती के अक्सर
उस पर
उंगलिया उठती है ?

Zakir Ali 'Rajneesh' said...

Sahee kahaa. in netaaon ko ab aaina dikhane ka samay aa gayaa hai.

ranjan said...

सही कहा.. नेता देश के सामने अपनी वि्फलताए छुपाने के लिये इस तरह के भद्दे कमेंट कर रहे है..

पुरुषोत्तम कुमार said...

नारी की ताकत को भला कौन भूल सकता है। झांसी की रानी से लेकर आज तक का इतिहास हमारे सामने है। भाजपा नेता नकवी ने जिस अंदाज और जिस भाषा में अपनी बात कही, वह भत्सॆना के लायक है। चौतरफा उसकी निंदा हुई भी। लेकिन डॉक्टर श्याम गुप्ता जो बात कह रहे हैं, उस पर गौर किया जाना चाहिए। किसी को लिपस्टिक-पाउडर पर भला क्या एतराज हो सकता है? मुद्दा यह है कि जब हम श्रद्धांजलि देने जा रहे हैं तो लगना भी चाहिए कि किसी की शहादत को सलाम कर रहे हैं। जश्न और शोक का फकॆ तो दिखना ही चाहिए। बात नारी या पुरुष की नहीं है। शोक प्रकट करने के लिए कोई पाटीॆ वाली वेशभूषा में जाएगा तो अच्छा तो नहीं ही लगेगा।

mehek said...

rachana ji repost ke liye shukriya.

shyam ji aur P kumar ji kisi nari ko ye batane ki jarurat nahi ke kaha liptick lagakar jaye,abhi tak nari mein wo shalinta aur garima baki hai ke shahid ko push arpit karte waqt mukh nahi rangana chahiye.kya aapne dekha hai kisi nari ko listick powder lagakar shradhanjali dete huye? yaha baat sirf kisi galat neta ki galat vakha ki ki hai hamne .

मिहिरभोज said...

jajvaa to theek hee hai yoro

par shamaa jalaane ke liye,

lipistik kee kyaa jarurat hai?

shaheedon ko kyaa lipistik

dikhaanaa yaaro. डा श्याम से सहमत...दुख प्रकट करने के लिए मैकअप जरूरी भी तो नहीं

रचना said...

"शोक प्रकट करने के लिए कोई पाटीॆ वाली वेशभूषा में जाएगा तो अच्छा तो नहीं ही लगेगा।"
"दुख प्रकट करने के लिए मैकअप जरूरी भी तो नहीं"

oh nahin jaantee thee ki dukh aur shok pragat karnae kae liyae pehlae muh dohna , safed vastr dhaaran karna jarurii haen .
mae to samjhtee thee dukh man mae hota haen aur ham jahaan ho jaese ho jis vaeshbhusha mae , jis paridaan mae usii mae uth kar apnee samvaednaaye vyakt karae

agli baar dhyaan rakhugii ki pehlae kapade badlu , ankh mae glisreen laggau aur phir jaakar shaheedo ko naman karu

thanks meri jaankari baadnae kae liyae

shyaad hamesha mudaae sae hat kar baat ki jaatee haen isii liyae ham hamesha bhataktey hee rehtaey haen

bekaar hen mehak yaahan shok manaana kyuki yahaan shok kapdo kae rang aur makeup sae aakana jaata haen

mehek said...

rachana ji i agree with u kuch log baat ko galat matlab se dhekte hai,shayad shok sabha mein bhi ye lipstick powder takte honge:);)

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

श्री नकवी को माफ़ करे वह परेशान है क्योकि दो लिपिस्टिक लगाने वाली जयाप्रदा और बेगम नूर बानो से मात खाए बेठे है ,आगे भी पिटाई की पूरी उम्मीद है

पुरुषोत्तम कुमार said...

बात लगता है गलत दिशा में जा रही है।
...आपकी बात बिल्कुल सही है, शोक प्रकट करने के लिए कोई कपड़े तो नहीं बदलेगा। लेकिन शोक प्रकट करने के लिए कहीं जाना हो तो अवसर का ख्याल रखा ही जाना चाहिए। हमारा कहना सिफॆ इतना है कि कुछ लोग वाकई शोक प्रकट करने के लिए भी कपड़े बदलकर जाते हैं। मौके का ध्यान नहीं रखते। ...पिछली टिप्पणी का मतलब सिफॆ इतना ही था।
दुख सचमुच मन में होता है। लेकिन यहां बात दुख प्रकट करने के मंच की हो रही है।

सुनीता शानू said...

जहाँ तक श्रधान्जली देने जाने वालों के कपड़े और चेहरे एक से होते हैं...जो देखा है अब तक...किन्तु कपड़े बदलने से चेहरे का रंग कैसे बदल पायेंगे ये लोग? यदि कोई नवविवाहिता का पति मर जाये तो शायद उसे मेहंदी रचे हाथों की अगर मेहंदी न उतरे तो हाथ काट कर घर रख देने चाहिये...लिपिस्टिक लगी देखी मगर आँख में आये आँसू न देखे गये? लानत है ऎसे लोगो पर
हो सकता है गलती से ऎसा हुआ हो की चेहरे पर लिपिस्टिक लगी रह गई...माफ़ करना अगर किसी को दुख पहुँचे किन्तु लोग वहाँ श्रधान्जली देने गये थे या महिलाओं का चेहरा देखने ?

Rekha Srivastava said...

गुप्ताजी,
क्या बाल बिखेर कर और अस्त-व्यस्त वेशभूषा में ही शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा सकती है. मत भूलिए कि बांग्लादेश कि लडाई और आपरेशन ब्लू स्टार को अंजाम देने वाली एक महिला ही थी और उसके अस्तित्व से ही सृष्टि है. आक्षेप लगाना आसन है लेकिन उसके औचित्य को सोचे समझे बिना टिपण्णी करना उचित नहीं .

सुनीता शानू said...

विश्वशनीय सूत्रों से यह ज्ञात हुआ है कि नकवी महोदय इलाहबाद के रहने वाले है और वहाँ यात्रिक होटल के सामने इनकी कॉस्मटिक्स की दुकान थी जिसके यह मालिक थे...अब लगता यह है कि श्री नकवी जी नेता बनने के बाद भी अपनी जड़ों से पूरी तरह जुड़े हुए हैं...और लिपस्टिक को नही भूल पाये...:)