सामाजिक कुरीतियाँ और नारी , उसके सम्बन्ध , उसकी मजबूरियां उसका शोषण , इससब विषयों पर कविता

Friday, March 13, 2009

होली

फागुन आया उड़ रहाअबीर और गुलाल
होली में सब मस्त हुएकिसका पूछे हाल


बसंती रंगो मे डूबे
khila हास परिहासफागुन में मदमस्त हुए सबछाया उल्लास
सरसों फूली टेसू महकाखिला हारसिंगार


पीली चुनर ओढ़करप्रकृति ने किया श्रृंगार .

8 comments:

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

होली कैसी हो..ली , जैसी भी हो..ली - हैप्पी होली !!!

होली की शुभकामनाओं सहित!!!

प्राइमरी का मास्टर
फतेहपुर

Udan Tashtari said...

फागुनी रचना के साथ होली की शुभकामनाऐं-आपको भी!!

रचना गौड़ ’भारती’ said...

लगातार लिखते रहने के लि‌ए शुभकामना‌एं
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
http://www.rachanabharti.blogspot.com
कहानी,लघुकथा एंव लेखों के लि‌ए मेरे दूसरे ब्लोग् पर स्वागत है
http://www.swapnil98.blogspot.com
रेखा चित्र एंव आर्ट के लि‌ए देखें
http://chitrasansar.blogspot.com

Vibha Rani Shrivastava said...

आपकी ये रचना कल 6-3-2012नई-पुरानी हलचल पर पोस्ट की जा रही है .... ! आपके सुझाव का इन्तजार रहेगा .... !!

Asha Saxena said...

रंगों से भरी रचना के लिए बधाई | आशा

expression said...

फागुनी रचना के लिए बधाई...
होली मुबारक हो....

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

होली की शुभकामनायें ...

vidya said...

सुन्दर रचना....
होली की शुभकामनाऐं