सामाजिक कुरीतियाँ और नारी , उसके सम्बन्ध , उसकी मजबूरियां उसका शोषण , इससब विषयों पर कविता

Tuesday, March 10, 2009

*रोशनी*

मन के अंधेरों में भटकोगे तो रोशनी कैसे पाओगे ,
सोचने को तो बहुत है पर कुछ करके तो दिखाओगे ,
कल्पना की उड़ान तज कर अब यथार्थ अपना लो ,
तभी तो संकट- संघर्ष में धरा पर पैर जमालोगे.।

साहस करो तो मन के अंदर भी तेज ही पाओगे ,
तन की तपन तज तब ही तो तुम आगे आओगे,
जीवन की सूखी फुलवारी में आशा के दीप जलेंगे ,
विद्युत् लय से तिमिर चीरकर स्वप्न पूरा पाओगे।


*अलका मधुसूदन पटेल*


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