सामाजिक कुरीतियाँ और नारी , उसके सम्बन्ध , उसकी मजबूरियां उसका शोषण , इससब विषयों पर कविता

Monday, October 11, 2010

स्वयंवर

 स्वयंवर 
जो हुआ था 
अम्बा, अम्बिका, अम्बालिका का 
सीता और द्रौपदी का 
क्या वास्तव में स्वयं-वर था?
अगर था
तो क्या थी स्वयंवर की परिभाषा?
स्वेछित वर चुनने का अधिकार
अथवा कन्या का नीलामी युक्त प्रदर्शन!


जिसमें 
इच्छुक उमीदवार
धन-बल की अपेक्षा
 लगाते थे अपना बाहू-बल 
दिखाते थे अपना पराक्रम और कौशल 
और जीत ले जाते थे कन्या को 
भले ही इसमें उसकी सहमति 
हो या  न हो.


तभी तो उठा लाया था भीष्म 
उन तीन बहनों को 
अपने बीमार और नपुंसक भाइयों के लिए.
और अर्जुन ने बाँट ली थी याज्ञसेनी
अपने भाइयों में बराबर.


वास्तव में ही अगर 
स्वयंवर  का अधिकार 
नारी को मिला होता
तो अम्बिका और अम्बा की 
(आत्म) हत्या का बोझ  
इतिहास न ढोता.


महा विध्वंसकारी महाभारत का
 युद्ध न होता  
और हमारी संस्कृति, हमारा इतिहास 
कुछ और ही होता.
हाँ ! कुछ और ही होता.
                                   
                                              






    
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2 comments:

रचना said...

kavita blog par aapka swaagat haen poonam aap ko yahaan daekh kar mujhe khushi hui

वन्दना said...

बेहद उम्दा रचना सोचने को मजबूर करती है और एक सत्य से रु-ब-रु करवाती है।