सामाजिक कुरीतियाँ और नारी , उसके सम्बन्ध , उसकी मजबूरियां उसका शोषण , इससब विषयों पर कविता

Thursday, September 2, 2010

शुभ चिन्तक

वो हर इंसान जो
किसी भी नारी को
प्रेरित करता हो
दब्बू बन कर रहने को
और अपने को उस नारी का
शुभ चिन्तक कहता हो
वो एक झूठ को
खुद भी जीता हैं
और दुसरो को भी मजबूर करता हैं
उस झूठ को जीने को

2 comments:

निर्मला कपिला said...

वाह चन्द शब्दों मे कितनी बडी और सही बात कह दी। धन्यवाद।

mridula pradhan said...

bahot achche.