सामाजिक कुरीतियाँ और नारी , उसके सम्बन्ध , उसकी मजबूरियां उसका शोषण , इससब विषयों पर कविता

Friday, December 9, 2011

स्वयंवर

स्वयंवर
 जो हुआ था अम्बा,अम्बिका,अम्बालिका का
सीता और द्रोपदी का
क्या वास्तव में स्वयंवर था क्या?
अगर था,
तो क्या थी स्वयंवर  की परिभाषा?

स्वेछित  वर चुनने का अधिकार
अथवा
कन्या का नीलामी युक्त प्रदर्शन!
जिसमे इच्छुक उमीदवार
धनबल की अपेक्षा
 लगाते थे अपना बाहू-बल
दिखाते थे अपना पराक्रम और कौशल
और जीत ले जाते थे कन्या को
भले ही उसकी सहमति हो या न हो.

तभी तो उठा लाया था  भीष्म
उन तीन बहनों को
अपने बीमार,नपुंसक भाइयों के लिए
और अर्जुन ने बाँट ली थी याज्ञसेनी
 अपने भाइयों में बराबर


वास्तव में ही अगर
स्वयंवर का अधिकार
नारी को  मिला होता
तो अम्बा की 
आत्म(हत्या) का बोझ
इतिहास न ढोता.
महाविध्वंस्कारी,महाभारत का
 महायुद्ध न होता
और हमारी संस्कृति, हमारा इतिहास
 कुछ और ही होता .
हाँ! कुछ और ही होता .


© 2008-13 सर्वाधिकार सुरक्षित!

10 comments:

वन्दना said...

वाह पूनम जी आपने तो इतिहास को कटघरे मे खडा कर दिया और एक कटु सत्य कह दिया…………शानदार अभिव्यक्ति।

डॉ. पूनम गुप्त said...

बहुत -बहुत धन्यवाद वन्दना जी ।

Rashmi Swaroop said...

How true!
..and unfortunately the very truth! Which you've expressed in words so perfectly.

डॉ. पूनम गुप्त said...

Thanks Rashmi ji!

ITU RAJPUROHIT said...

apake blog per bhut sundar rachanai hai.follow my blog.

dinesh aggarwal said...

हृदय को झझकोरने वाली रचना को शत-शत नमन।
आपने ऐसे अकाट्य सत्य को अभिव्यक्त किया है,
जो अभी तक शायद रचनाकारों की कलम से अछूता
था।

डॉ. पूनम गुप्त said...

बहुत -बहुत धन्यवाद

Naveen Mani Tripathi said...

behad sundar prastuti ... abhar.

NISHA MAHARANA said...

sahi bat.

RAJESH KUMAR said...

I Love this Article, Thanks For Sharing..
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