सामाजिक कुरीतियाँ और नारी , उसके सम्बन्ध , उसकी मजबूरियां उसका शोषण , इससब विषयों पर कविता
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Friday, December 31, 2010

मंगलमय हो यह नव-वर्ष!


नया साल आया है फिर से 
                 सबके लिए यह  हो आदर्श.
नये साल में सत्य अहिंसा
                  हो सबका जीवन-निष्कर्ष.
भूल जाएँ सब रंजोगम को
                 मिलजुल करें विचार विमर्श.
सुख-समृधि , धान्य-धन बढ़े
                 मधुर बने जीवन संघर्ष.
सुख-चैन रहे सभी दिलों में
                 गाएँ मिल सब गीत सहर्ष.
हे प्रभु! यही विनती हमारी
                  मंगल मय हो यह नव-वर्ष.


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